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Wednesday, April 18, 2018

“जुगनू”

वो सितारों से अक्सर कह पड़ता हैं,
मैं भी जुगनू बन जाना चाहता हूँ

मैं भी हरदम, टिमटिमाना चाहता हूँ
एक पागल राही को,
जो की अक्सर, हज़ारों ख़्वाब लिए,
मंज़िल की तलाश मे
रास्ते मे मिल जाता हैं,
एक राह दिखाना चाहता हूँ

जानते हो, नभ के सिपाही,
वो अंजान  राही
धरा की इक शाख़ से उलझा हुआ हैं
जुगनुओं को हृदय मे सजाकर
कुछ दूर वो चलना चाहता हैं

जुगनू की तरह वो भी 
हर बात पे, मुस्कुरा कर जलना चाहता हैं।

नभ मे जड़े मोतियों से अक्सर कह पड़ता हूँ मैं,
तुमने चाँद को रोशनी दी हैं
उसका हर कोई दीवाना हैं,
वो हर किसी को रास्ते दिखाता हैं
मुझको भी एक राही को
मंज़िल तक ले जाना हैं

वो सितारों से अक्सर कह पड़ता हैं
मैं भी जुगनू बन जाना चाहता हूँ

- रोशन कुमारराही


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