Follow by Email

Saturday, June 10, 2017

"इक ख़त - तुम्हारे लिए"

ये दिल, इक ख़त, कई बार जलाना चाहता हैं
स्याही और लब्जो से, कुछ बताना चाहता हैं ।

इक उम्र बाकी है अभी
हाँ, ख़्वाहिशों के शोर में,
फिर से, मेरा नादा दिल,
तुम्हें गले लगाना चाहता हैं ।

कही किसी राह पर, 
तुम्हारे साथ मुस्कुराना चाहता हैं ।
हाँ, अब कैद महसूस करती है सांसे मेरी,
इन ईंट की दीवारों में 

बस इक बार, इक लम्हें के लिये,
रौशनी की तलाश में , साथ तुम्हारें, 
दिल, अंधेरों की दुनियाँ में
गुम हों जाना चाहता हैं ।

हाँ, अब भी ख़त लिखकर, 
दिल तुमको, इक बात बताना चाहता हैं ।
उसी ख़त को , दिल, कई बार जलाना चाहता हैं ।
स्याही और लब्जो से तुमको
दिल, इक बात बताना चाहता हैं ।


-रोशन कुमार 'राही"

Read More