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Sunday, September 25, 2016

तुम तक...इक राही का सफर

ज़िन्दगी
इक सफर हैं राही का
जो उसे अंधेरों तक ले जायेगा
मालूम था उसको की इक दिन
कोई तुमसा नजर आयेगा
और एक ख़्वाब-ए- इश्क़
उसके रास्तों की रोशनी बन जायेगा ।

जिंदगी
ख्वाबों की इक दुनियाँ हैं
जहा अक्सर घूमने जाता हूँ मै
वहा सिर्फ़ तुम नजर आते हों
मेरी मुहब्बत, मेरी सजा बन के ।

जिंदगी
हिम सी शीतल, तुझसी प्यारी
और तेरी मुस्कुराहटों का सिलसिला है 
मंजिलें कहतीं है मुझसे, 
तुझ तक रास्ता ख़्वाहिशों की कब्रगाह 
से होकर जायेगा 
इक सफर में हैं तू "राही"
ताउम्र तू चलता ही रह जायेगा ।

बस रो पड़ता खयालों की भीड़ में  
नादाँ दिल मेरा,
और कह पड़ता हैं,
ज़िन्दगी
इक सफर हैं तेरा ऐ "राही"
जो तुझे अंधेरों तक ले जायेगा ।



रोशन कुमार "राही"


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मंजिल

मेरें तन्हा मन की आँखों में
मिल जाओ तुम
कभी नमी, कभी रौशनी बनकर,
मुझसे मिलने आओं तुम ।

हर पल, मेरी आँखों में निशाँ हों 
तेरी मुस्कुराहट का,
मेरी यादों में जब आओ तुम
मेरी बनकर आओ तुम ।

क़ोई सरहद, कोई मंजिल 
जो दूर तुझे ले जाये,
बागों में मेरे, फुलों की तरह
मिल जाओ तुम ।

जब भी इश्क़ की बात आती हैं
दिल तेरे घर ले जाता हैं
अब बस मेरा निशाँ हों, तेरा निशाँ हो
और एक वक़्त हमारा हो,
मेरे इश्क़ की राहों में 
बस मंजिल बन जाओ तुम ।
मेरें तन्हा मन की आँखों में
मिल जाओ तुम ।

  रोशन कुमार "राही"


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इज़हार

कितना मुश्किल हैं इंतजार तेरा
कि तुझसे मिलना 
रोशनी में घुल जाने जैसा है
तुझे क्या मालूम कितना नादाँ है
इजहार मेरा ।

कहाँ मुमकिन है खुशियों का
ताउम्र साथ रह जाना
ये 'वो' जिंदगी है जहा
तुझसे मिल जाना भी 
एक ख्वाब हैं मेरा ।

न जानें  किन किन रास्तों पे 
ले जायेगा तेरा इश्क़ मुझको
हर राह पे इस राही को इंतजार है तेरा ।

बस चाहता हूँ तेरे इश्क़ में
थोड़ा चल के, थोड़ा जल के
ये उम्र गुजर जायें 
हा, तेरी मुस्कुराहट जैसा
प्यार है मेरा ।
तुझे क्या मालूम कितना नादाँ है
इजहार मेरा

रोशन कुमार "राही"


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