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Tuesday, October 11, 2016

अंतहीन सफ़र

अंतहीन सफ़र में इक परिंदा क्या चाहता है
क्या मिलता हैं चलते-चलते
कुछ ऎसे ही सवाल कांधे पर लेके
वो परिंदा कुछ दूर तक चलना चाहता हैं ।

पुछता हैं लोग इश्क़ क़रतें क्यूँ हैं??
क्या हर कोई इस दुनियाँ में जलना चाहता है??
उसे क्या मालूम आसमाँ का रंग 
किसी की मुस्कराहट जैसा हैं ।
वो परिंदा है फिर भी, 
इश्क़ समझने की खातिर
वो जमीं पर चलना चाहता हैं ।
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वक़्त गुजर गया है अब, 
उस परिँदे के दिल में भी कोई रहता है ।।
वो बस उस सख्श से मिलना चाहता है 

अब हजार कोशिशें  जाया चली गयी है
मिलने की, मुहब्बत से ।
अब नहीँ मालूम उसको की क्या रह गया है 
हासिल करने को,
अब बस इश्क़ उसकी मंजिल है
वो बस इश्क़ की राह पर चलना चाहता हैं 

इक लम्हा ऐसा आता हैं।
जब दिल उसका जलता है,
ख़ालीपन की आग में ।
और वो अब बस मुस्कराता हैं 
और जलना चाहता हैं ।

अब मालूम हैं उसको 
जिंदगी में मंजिल हर किसी को नहीँ मिलती
चलते रहने में सुकूँ हैं
वो अब सुकूँ की तलाश में 
बस चलते रहना चाहता हैं

रोशन कुमार "राही"


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Sunday, September 25, 2016

तुम तक...इक राही का सफर

ज़िन्दगी
इक सफर हैं राही का
जो उसे अंधेरों तक ले जायेगा
मालूम था उसको की इक दिन
कोई तुमसा नजर आयेगा
और एक ख़्वाब-ए- इश्क़
उसके रास्तों की रोशनी बन जायेगा ।

जिंदगी
ख्वाबों की इक दुनियाँ हैं
जहा अक्सर घूमने जाता हूँ मै
वहा सिर्फ़ तुम नजर आते हों
मेरी मुहब्बत, मेरी सजा बन के ।

जिंदगी
हिम सी शीतल, तुझसी प्यारी
और तेरी मुस्कुराहटों का सिलसिला है 
मंजिलें कहतीं है मुझसे, 
तुझ तक रास्ता ख़्वाहिशों की कब्रगाह 
से होकर जायेगा 
इक सफर में हैं तू "राही"
ताउम्र तू चलता ही रह जायेगा ।

बस रो पड़ता खयालों की भीड़ में  
नादाँ दिल मेरा,
और कह पड़ता हैं,
ज़िन्दगी
इक सफर हैं तेरा ऐ "राही"
जो तुझे अंधेरों तक ले जायेगा ।



रोशन कुमार "राही"


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मंजिल

मेरें तन्हा मन की आँखों में
मिल जाओ तुम
कभी नमी, कभी रौशनी बनकर,
मुझसे मिलने आओं तुम ।

हर पल, मेरी आँखों में निशाँ हों 
तेरी मुस्कुराहट का,
मेरी यादों में जब आओ तुम
मेरी बनकर आओ तुम ।

क़ोई सरहद, कोई मंजिल 
जो दूर तुझे ले जाये,
बागों में मेरे, फुलों की तरह
मिल जाओ तुम ।

जब भी इश्क़ की बात आती हैं
दिल तेरे घर ले जाता हैं
अब बस मेरा निशाँ हों, तेरा निशाँ हो
और एक वक़्त हमारा हो,
मेरे इश्क़ की राहों में 
बस मंजिल बन जाओ तुम ।
मेरें तन्हा मन की आँखों में
मिल जाओ तुम ।

  रोशन कुमार "राही"


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इज़हार

कितना मुश्किल हैं इंतजार तेरा
कि तुझसे मिलना 
रोशनी में घुल जाने जैसा है
तुझे क्या मालूम कितना नादाँ है
इजहार मेरा ।

कहाँ मुमकिन है खुशियों का
ताउम्र साथ रह जाना
ये 'वो' जिंदगी है जहा
तुझसे मिल जाना भी 
एक ख्वाब हैं मेरा ।

न जानें  किन किन रास्तों पे 
ले जायेगा तेरा इश्क़ मुझको
हर राह पे इस राही को इंतजार है तेरा ।

बस चाहता हूँ तेरे इश्क़ में
थोड़ा चल के, थोड़ा जल के
ये उम्र गुजर जायें 
हा, तेरी मुस्कुराहट जैसा
प्यार है मेरा ।
तुझे क्या मालूम कितना नादाँ है
इजहार मेरा

रोशन कुमार "राही"


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Tuesday, June 28, 2016

ख़्वाब


अधूरेपन की दहलीजों पर 
तेरी बातें अक्सर आती हैँ
खामोश पड़े इक राही को
चलने को उकसाती हैं ।

मेरा जहाँ इक कमरा हैं 
जहा अंधियारें रोशन रहते हैं
और कमरे के चौखट पे
तेरी बातें दीप नये जलातीं है ।
खिड़की से वो राहें दिखतीं हैं
जो तुझे मुझसे दूर ले जाती हैं।
कभी-कभी बस चलते-चलते
तू दूर बहुत चली जाती हैं 
मेरी सांसे मद्धम चलतीं हैं
तेरी आहट गुम हों जाती हैं ।

दूर देश की कोई हवा तुझसे मिलकर
दरवाज़े से अंदर आती हैं
झोली भर के ख़्वाब बुरे से
मेरे कमरे में राख जाती हैं 
तब इत्तेला होती हैं की
कितना अधुरां हूँ मै ।

फिर,
मेरे अधूरेपन की दहलीजों पर 
तेरी बातें अक्सर आती हैँ
ख़ामोश पडे एक राही को
चलने को उकसाती हैं 

फिर से,
तेरी बाते मेरे कमरे की चौखट पे
दीप नये जलाती हैं ।


-रोशन कुमार "राही"


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Monday, April 11, 2016

दिया

जब मै जिन्दगी के गहरे अंधेरों से देखता हू, तो दूर कही, एक मुकाम पर वो मुझे जलते दिए की तरह दिखती हैं ।


अंधेरों की शह पे बढती 
रूह मेरी चलती जाती हैं
तू है एक मिट्टी का दिया 
मंजिल की तरह दिखती है 
और दिल में कही जलती रहती है ।

क्यूँ न कहे दिल अपना तुझे
मेरे जेहन में तेरी परछाई 
हर रोज चिरागों सी जलती रहती हैं ।

न जाने कब तक जलती रहेगी 
तेरी तस्वीर मेरे दिल में 
न जाने कब तक तेरी मुस्कुराहट
मुझे रास्ते दिखलायेगी

तुझको पाने की कोशिश में
अंधेरों की शह पे बढती 
रूह मेरी चलती जाती हैं ।

अब दिल जल भी जाये तो अफ़सोस नहीं
जलते दिये से मिलने की 
चाह मेरी बढ़ती जाती है ।

कोरे पन्नों की धड़कन पे 
जब स्याही लिखती है नाम  तेरा 
दूर कही मन को रोशन सा 
एक मिट्टी का दिया
मंजिल की तरह दिखायी देता हैं
और दिल में कही जलता रहता है

-रोशन कुमार "राही"


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Tuesday, February 23, 2016

एहसास - एक राही का सफ़र


इक दिल हो जो मेरा हो
इक दर्द मुहब्बत जैसा हो
इक ख्वाब तुम्हारे जैसा हो 

दिल के आईने में यादों की बारिश हो 
हर आवाज तुम्हारी हो,
हर तस्वीर तुम्हारे जैसी हो

जब थामू मैं हाथ कोई, 
फिर से आँखे बंद करके
वो अहसास तुम्हारे जैसा हो
बस यूँ लगे कि क़ोई हो, 
तो तुम्हारे जैसा हो

जब "तेरे सामने होने सी"
दौलत दूर मुझसे जाये
नम शोहरत मेरी आँखों से 
ख्वाबों की तरह गिर जाये

और मेरा पागल दिल पैमानों में 
मुस्कराहट भर के इक गीत नया सा गाये
और हर लव्ज तुम्हारे जैसा हो 
हर बात तुम्हारे जैसी हो

और कलम लिखे मेरी
इक दिल हो, जो मेरा हो 
इक दर्द मुहब्बत जैसा हो 
इक ख्वाब तुम्हारे जैसा हो
इक हम-कदम तुम्हारे जैसा हो 
इक मंजिल तुम्हारे जैसी हो 

   -रोशन कुमार "राही"

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Thursday, February 18, 2016

कागज और स्याही

उस बंद किताब ने फिर बुलाया है 
उस सूखे गुलाब ने फिर पुकारा है 
उन ग़ज़लों और उस स्याही 
ने हमें फिर पुकारा है 
इस दिल की तबाही ने हमें 
फिर पुकारा है 

कोरे कागज ने कहा है स्याही से, 
फिर से मुहब्बत हो गयी है तुमसे 
स्याही कहती है 
कितना बेरंग अक्स तुम्हारा है 
तुम जैसे कइयों ने मुझे पुकारा है 

जरा सा दिल में तो पनाह दो 
कोई आग दिल में फिर से तुम लगा दो 
मुहब्बत न करो, बस ख्वाब दिखा दो 

हम वो है जिसके वजूद को 
मंजिल तुमने दी है 
आज भी रोता हूँ 
कि हम वो कागज है 
जिसके सीने पर, इक जालिम ने 
कलम छोड़ दी है 

उन सुखी पत्तियों ने जो 
जख्म लिखे है, मेरे दामन पे 
उन महकती बहारों ने मुझे 
फिर से पुकारा है 

हम तो कागज है, उस मुकाम के 
ऐ "राही" ऐ "साहिल" ऐ स्याही 
जहा सिर्फ तू ही इमान हमारा है 

उस बंद किताब ने फिर बुलाया है 
उस सूखे गुलाब ने फिर पुकारा है 

Written by -
-रोशन कुमार "राहीं  & भावेश

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अमरप्रेम

तेरी याद में वो राह मेरी,
 पीछे छूट गयी 
इस दिल की आह इक,
 पीछे छूट गयी
तेरी मुस्कुराहट को याद कर के  
वो मुस्कुराहट मेरी, पीछे छूट गयी

मय  में हर कोई कहता है 
अपनी-अपनी कहानी 
तुझे देखा तो वो कहानी मेरी 
पीछे छूट गयी

डूबते सूरज को देखा तो 
ये ख्याल आया 
वो सपनों की रानी मेरी 
पीछे छूट गयी

वो मुस्कुराते थे  देखकर मुझको 
सितम ढाने के इरादे से 
वक़्त गुजर गया है "शायद"
और बात पीछे छूट गयी 

दीवाने मरते थे मेरी दीवानगी देखकर 
और अब ये राह मुझसे पूछती है
क्या वो उम्र पीछे छूट गयी ??


जो दिल धड़क रहा है तुम्हारा 
ऐ "राही" ऐ "साहिल" 
तो समझना की मुहब्बत 
आज भी है मुझे, उससे 
की होश खोकर फिर आएंगे , तेरा होने को 
उन गलियों की दहलीज़ों पर 
जहां मुहब्बत की वो बात 
और वो ईक मुलाकात 
मेरे अधूरे इजहार की बात 
अधूरी - पीछे छूट गयी

Written by -
-रोशन कुमार "राहीं  & भावेश 



 

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