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Sunday, October 25, 2015

आ फिर से तुझे पास लिख दू अपने

आ फिर से तुझे पास लिख दू अपने 
इक बारिश ढूंढ  लाऊ 
और भीग जाऊ फिर से साथ  तेरे 
कुछ देर के लिए 

हर रोज जिंदगी एक जैसी न होगी 
हर बार वक़्त खुद को नहीं दोहराएगा 
एक दिन किरने ढल जाएँगी 
और तेरी खशबू मुझसे छिन  जाएगी 

आ फिर से तुझे बाँहों में भर लू अपने 
तू जो एक ख्वाब मेरा है 
तुझे देख कर बुनता है मेरा दिल सपने 
इक लम्हा, इक राह जो तेरे साथ गुजर जाएगी 
मेरी जिंदगी सुकून से भर जाएगी 
 फिर से, कुछ देर के लिए 

आ फिर से तुझे पास लिख दू अपने 
लिख दू फिर से की तुझसे मुहबत है 
लिख दू  फिर से तेरे की साथ चलना है 
लिख दू कितनी नफरत है मुझे 
तुझसे दूर जाने से,

बस मिल जाये स्याही थोड़ी और,
की तेरी धड़कानो को लिख दू 
धड़कनो के पास अपने 

 -रोशन कुमार "राहीं


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किनारें


इतनी मुहब्बत से लिखा है 
तेरा नाम आँखों से सितारों में 
जैसे खोयी कश्ती को 
ढूंढ लिया हो किनारों ने 

तू भी क्या चीज़ है  राही 
बस कूद पड़ता है खाई में 
मुहब्बत की मीनारों से 

फूट कर रोया हूँ 
अपनी कहानी कह कर
 कतरों की आहट को सुना है 
मेरे कमरें की दीवारों ने 

इतनी सिद्दत से जला हूँ
दिए की तरह 
मुझे रोशन कहा है हज़ारों ने 

जब रात की शोहरत में
 तारें गुजरते है 
तेरी यादें मेरी आँखों में चमकती है 

दिल उस म्यान सा बिखर गया है मेरा 
जिसे छलनी किया हो
 इश्क़ सी तलवारों ने 

इतनी मुहब्बत से लिखा है 
तेरा नाम आँखों से सितारों में 

 -रोशन कुमार "राहीं "
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Sunday, October 11, 2015

तू है मेरा किनारा

ये दुनियाँ  बहती नदियाँ  है 
तू है मेरा किनारा 

यहाँ झरने है संगीत है 
मुहब्बत है, उम्मीद है 
तू इक ख्वाब है प्यारा 
तू है मेरा किनारा 

ये दुनियाँ  रौशन है  क्योंकि 
कुछ सितारें जल रहे है 
तेरी अच्छाई  तेरी बुराई 
तेरी जिंदगी का हर पहलू 
मुझे मेरा लगता है 
तू है मेरा सितारा 

'इश्क़' इक ख्वाब है राही का 
इक सुबह बिखर जायेगा 
कल को न जाने सफर
किस दरिया में ले जायेगा 
उमीदों से भरी ये रातें लम्बी है 
तू मेरे सपनो की सुबह है 
तू इक ख्वाब है प्यारा 
तू है मेरा किनारा 


 -रोशन कुमार "राहीं "

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