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Monday, August 31, 2015

कुछ ऐसे गुजरे जिंदगी



कुछ ऐसे गुजरे जिंदगी 
जैसे तेरी - मेरी कहानी हों 
अपनी किस्मत खुद लिखू मै 
और वो कुछ तेरी कुछ मेरी जुबानी हो 

जो दर्द का इक कतरा भी 
बिखरें तेरे ऊपर 
एक उम्र ऐसी गुजरे 
जिसमे मेरी आँखों में पानी हो 

मेरे सीने को कुछ ऐसे छू जाये तेरी साँसें 
जैसे इक अंधियारे की रौशनी से मुहब्बत 
में मिट गयी पूरी कहानी हो 

मै लिखू बेहिसाब तुझे  सोचते हुयेँ 
और जिंदगी कुछ ऐसे गुजरे 
जैसे ये सिर्फ तेरी मेरी कहानी हो.

-रोशन कुमार "राहीं "

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"इश्क़ ".….... इक राहीं का सफ़र

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उसकी दुनियाँ  से आते हुये 
बेफिक्र, अपनी शज़र को जाते हुये 
मेरा वजूद उसकी यादों में खोया रहता है 
और अक्सर मैं राह भटक जाता हूँ 

दूर तक फ़ैली वीरानी से 
पूछता हूँ अपने रस्ते की दिशा 
और चाँद कहता है कि 
ऐसे सिरफिरों पे मैं मुस्कुराता हूँ 

चाँद को कहता हूँ मैं 
की मुहब्बत है मुझे
फिर वो कहता है कि 
रुक मैं तुझे तेरी राह बताता हूँ  
कूछ दूर तू मेरा पीछा कर 
कूछ दूर तू साथ चल मेरे 
नजर आएगी तुझे तेरी मंजिल वहा 
जहा हर बार मैं तुझे ले जाता हूँ 

aur fir jab Rahi manjil pe phoch jata hai to wo chand se kehta hai ki...

ऐ चाँद, जो कभी वो मुझे ढूंढे तो बताना उसको 
की हर बार मैं इसी रस्ते से जाता हूँ 
उसे बताना की इतनी मुहब्बत है उससे 
की मैं उसकी यादो में गुम रहता हूँ  
और अक्सर राह भटक जाता हूँ. 

                                                       -रोशन कुमार "राही" 











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Tuesday, August 25, 2015

इक गीत

Once a friend came to me and asked me to write a song for her and her boyfriend. normally i find my self unable to write on such demands because poetry is something that comes to me  all by itself i have never forced my self to complete a poetry, and there is no  fixed time when any poetry will come to me, i have penned many poetry when i was on WC(water closet" (flush toilet)). 
But my friend's desire for a poetry was pen-able so i wrote this. 

कहीं ढल जाये सूरज  और 
हवाओं में इक गीत तेरा मेरा हों 
ये बादल बरसें मुझपर झूम कर 
और बूंदों में हर रंग तेरा हो 

तू मिल जाए मुझे 
मुकद्दर की लकीरों में 
हर दिन तेरी बाँहों में एक नया सवेरा हो 
लिख दे एक गीत इक दुनिया ऐ "राही" 
जिसमे मै  उसकी हूँ और वो मेरा है 

बस कहीं ढल जाये सूरज 
और मेरा मन पंछी की तरह 
उड़ जाये साथ तेरे 
और हवाओं में एक गीत तेरा मेरा हो 

कुछ  ऐसे देख मेरी आँखों में की 
ये दुनिया धुंधली पद जाये 
तू ऐसे रस्ते बुन जिनपे 
जिंदगी जैसा एक सफर तेरा मेरा हो 

एक ऐसी मंजिल पे ले चल 
जहां हर शाम हवाएं गीत गुनगुनाती हो 
और वो गीत तेरा मेरा हो. 

बस ले चल  कहीं दूर 
जहां सूरज ढल जाये और 
हवाओं में इक गीत तेरा मेरा हो 

 -रोशन कुमार "राही"



  
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Tuesday, August 11, 2015

इक मुलाक़ात

ye kavita maine us lamhe ke liye likhi hai jisme ek ghajal ko sharab se ek rahi ko uske safer se aur ek insan ko apani jindagi se, Aur kisi ko kisi se "Ek mulakat" me muhabbat ho jati hai. ager apki ghajal hai ya apko rasto se muhbbat hai ya fir ager kabi apko bhi muhbbat ho gyi kisi se pehli mulakat me to ye kavita apke liye hai. 




कुछ लिखूँ कि  कोई  जवाब मिल जाये 
मेरी ग़जल को कोई नयी शराब मिल जाये 
मेरा दिल जलता रहें  ताउम्र और 
तुझें रौशनी बेहिसाब मिल जाये 

यूँ तो एक ही जिंदगी है एक ही मजिंल है मेरी 
तू बस मुस्कुराती रहे हमेशा 
और मुझे नये मुकाम मिल जाये 

चलना चाहत तेरी भी है मेरी भी है 
मै दो कदम चलू और 
जिंदगी के एक नये सवेरे में 
 तेरा साथ मिल जाये 

की तुझे मुझसे और मुझे तुझसे  मुहब्बत हो 
बस यूँ  ही मुस्कुराते हुये
 जिंदगी साथ गुजर जाये 

कूछ लिखूँ कि  कोई  जवाब मिल जाये 
मेरी ग़जल को कोई नयी शराब मिल जाये। .......

-रोशन कुमार "राही" 


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Monday, August 3, 2015

तेरे आने की आहट भर से

I strongly believe that every thing sounds beautiful when there is a story behind its existence. Each one of my poems has a story.
A month ago I met someone, on the very first day her expressions reminded me of someone. For a moment I felt like that "someone" is back again after almost a decade. And for a moment I was happy. so with a few simple strokes of pen i wrote this,

तेरे आने की आहट  भर से 
जिंदगी बदल गयी हैं
ऐसा लगा जैसे , कुछ पल चली है जिंदगी 
और मंजिल मिल गयी है 
यूँ तो मेरे हर गीत अधूरें  है
तेरे आने से एक ख्वाइश 
मुकम्मल हो गयी है

बड़ी शिद्दत से उठती हैं, वक़्त के दामन में लपटें 
कुछ बदल देने को 
सपनों  में, तेरे आने की आहट  भर से 
मेरी जिंदगी बदल गयी हैं
    -रोशन कुमार "राही" 

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