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Thursday, September 19, 2013

तसवीरें





तूने उसे  खोया मैंने तुझे खोया 
कुछ तो तेरी  बातों   ने रुलाया 
कुछ मै अपनी बेबसी पर रोया 
कही दर्द  ना हो तुझे मेरी आँखों  देखकर 
तेरी खुशियों खातिर मै मुस्कुरा कर रोया 
देख ना ले मुझे बेबस तू 
तेरी खातिर को खुद को मै 
तेरी बाहों में छिपा कर रोया 
तेरे नाम की दौलत दिल में भर कर आया था 
मेहकदों में सब कुछ लुटा कर  रोया 

जब तूने जाहिर किया शब्दो में
तुझे भी भी प्यार है मुझसे  
मै तुझको अपने साथ रुलाकर कर रोया 
तेरी तस्वीर को सीने से लगा कर  रोया 
होश था बीतें लम्हों में शायद 
मै शाकी के साथ लडखडा कर रोया 

कुछ जिंदगी की  बीती बातें  है
तेरे साथ गुजरे लम्हों की यादें है 
कभी तुझे भुलाकर तो
कभी अपना बनाकर रोया 
माना किसी और की अमानत है तू 
कुछ शिकवें दिल में जलाकर,
तो कुछ आखों  में सजाकर कर  रोया 
तेरी याद में खुद को भुला कर  रोया 
अब यादो में आना छोड़ दे मेरे 
कुछ अपने दिल को समझा कर 
तो कभी तेरे  शहर से दूर जाकर जा कर  रोया

 ,,,,,,,,,,,,,,,,roshAn”

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Thursday, September 12, 2013

तलाश "हैरत" की






वक्त  सवरता रहता  है, मन भीगता रह जाता है 
घुंघरू चीखते रहते है,दिल टूटता रह जाता है 

पंछी  जो बैठे  है उमीदों  की डाल  पर 
रखते है ख्वाबों  में कुछ परछाईयां संभाल  कर 
शामें ढलती रेहती है, दिल भागता रह जाता है 
सपने जलते रहते है, मन देखता रह जाता है 

रखी है दिल में मैंने अब भी, कुछ शेहतीरें संभाल कर 
जल रहे है अरमा मेरे, जैसे लौ मशाल  पर 
महफ़िलें चीखती रहती है, मै तुझे देखता रह जाता हू
मै  अपनी बन्द आँखों में तुझे ढूंढता रह जाता हू

अब आइने देख घबराता है दिल
उन लम्हों के अरमां को नही समझ पाता है दिल 
मंजिलें ढूंढटी रहती है मुझको, मै तुझे सोचता रह जाता हू

वक्त  सवरता रहता है, मन भीगता रह जाता है 
घुंघरू चीखते रेहते है, दिल टूटता रह जाता है 
                     ...............रोशन "



                                 
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Friday, September 6, 2013

शेहतीरें



एक आइना मेहरूम है आपने तकदीर की  लकीरों से
एक चाहत हर पल जली  है लौ में शेहतीरों से

चाहतें है पंखो पंखों में आसमा  छूने की अबभी
लहरों की कशिश उलझी है
मेरी पतवार से अब भी
वो शायर तेरे शेहेर को आया था
एक रौशनी खाक हूई दिल की दीवारों में तब भी
की अब वो मशरूफ है
किसी की मुशकूराहट भरी लकीरों में
मैहकदों में जली है चाहत पैमानों  की तस्वीरों से
की एक जिंदगी मेहरूम है तेरे चाहत भरे सवालों  से
एक  रात हर लम्हा  जली  है मेरे अश्कों के उजालों से
एक आइना मेहरूम  है  आपने तकदीर की  लकीरों से
एक चाहत हर पल जली  है लौ में शेहतीरों से


चाहत हूई तेरे  इश्क़ में आसमा छूने की जब भी
तेरी ख्वाहिश  जुदा रेहने की चुभती है अब भी
तेरे इश्क में डूबकर मैंने खुद को पाया है
तुझे देखने फिर से वो आशिक तेरे शेहेर आया है
शोहरत मशरूफ रही है तेरी रौशन उजालो में
नजरे देखती है  तुझको चाहत के प्यालों में
एक नाजिनी  महरूम है मेरे कतरों और सवालों से
कोई हसरत हर पल जली है अंधेरों में ख्यालो से
कल की शाम अपने नाम सा रौशन हू मै
ढूंढता मुझको तेरी गलियों से
मेरी कब्र तक है तेरा काफिला आया
की तेरे इश्क में डूबकर मैंने है खुद को पाया

,,,,,,,,,,,,,,roshAn”



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