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Tuesday, January 23, 2018

“यादों का खजाना मेरा”

अक्सर खो जाता हैं यादों का खजाना मेरा,
मुझे देखना, मुस्कुराना फिर धुँआ हो जाना तेरा ।

तेरा चलना - फिरना, मुस्कुरा देना,
इक नई जिंदगी का आगाज कर देता हैं 
अब भी अमानत की तरह, मेरी याद में हैं,
एक बार मुझे देखकर मुस्कुराना,
और पलट कर ओझल हो जाना तेरा ।

अब नही आतें, मेरे शब्द जुबां पर,
तेरी कहानी कहने को,
थक गया हूँ,  और रास आ गया हैं,
मुझे हार जाना मेरा ।

तू कहती तो क्या चाँद नही लाता?
अब जब फुलों से मुरझाना सीख लिया है
तो फिरसे इश्क़ कर लूं ये राहें भी कहती हैं,
अब बस मुझे रास आता हैं गुजर जाना मेरा ।

मैं बस बेसुध रहता हूँ, 
और खो जाता है,
यादों का खजाना मेरा ।

-रोशन कुमार "राही"