Follow by Email

Sunday, September 25, 2016

इज़हार

कितना मुश्किल हैं इंतजार तेरा
कि तुझसे मिलना 
रोशनी में घुल जाने जैसा है
तुझे क्या मालूम कितना नादाँ है
इजहार मेरा ।

कहाँ मुमकिन है खुशियों का
ताउम्र साथ रह जाना
ये 'वो' जिंदगी है जहा
तुझसे मिल जाना भी 
एक ख्वाब हैं मेरा ।

न जानें  किन किन रास्तों पे 
ले जायेगा तेरा इश्क़ मुझको
हर राह पे इस राही को इंतजार है तेरा ।

बस चाहता हूँ तेरे इश्क़ में
थोड़ा चल के, थोड़ा जल के
ये उम्र गुजर जायें 
हा, तेरी मुस्कुराहट जैसा
प्यार है मेरा ।
तुझे क्या मालूम कितना नादाँ है
इजहार मेरा

रोशन कुमार "राही"