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Thursday, February 18, 2016

अमरप्रेम

तेरी याद में वो राह मेरी,
 पीछे छूट गयी 
इस दिल की आह इक,
 पीछे छूट गयी
तेरी मुस्कुराहट को याद कर के  
वो मुस्कुराहट मेरी, पीछे छूट गयी

मय  में हर कोई कहता है 
अपनी-अपनी कहानी 
तुझे देखा तो वो कहानी मेरी 
पीछे छूट गयी

डूबते सूरज को देखा तो 
ये ख्याल आया 
वो सपनों की रानी मेरी 
पीछे छूट गयी

वो मुस्कुराते थे  देखकर मुझको 
सितम ढाने के इरादे से 
वक़्त गुजर गया है "शायद"
और बात पीछे छूट गयी 

दीवाने मरते थे मेरी दीवानगी देखकर 
और अब ये राह मुझसे पूछती है
क्या वो उम्र पीछे छूट गयी ??


जो दिल धड़क रहा है तुम्हारा 
ऐ "राही" ऐ "साहिल" 
तो समझना की मुहब्बत 
आज भी है मुझे, उससे 
की होश खोकर फिर आएंगे , तेरा होने को 
उन गलियों की दहलीज़ों पर 
जहां मुहब्बत की वो बात 
और वो ईक मुलाकात 
मेरे अधूरे इजहार की बात 
अधूरी - पीछे छूट गयी

Written by -
-रोशन कुमार "राहीं  & भावेश