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Monday, December 7, 2015

"ऐ दिलनशीं "

...And the dusk was dwelling with de-light, waiting for moon to rise from the sea, in the garden of eternity. There i witnessed a Jugnu(firefly) and a bird enjoying the evening together and i over heard there conversation.


मैं कभी तेरी आँखों में देखूँ 
और मेरा दिल दरिया बन जाएं 
जिसकी लहरों पे तेरी मुस्कुराहटें,
तेरी मासूमियत कभी घूमने निकल जाएं 

बस मेरी जिंदगी को 
तेरी आहट तेरी मासूमियत  मिल जाएं 
मेरी उम्मीदें दूर तक खुशियों तलाश में जाये 
और बस एक मोड़ आये और मुझे तू मिल जाएं 

इश्क़ में जितना चलो कम  है 
कुछ कह के आँख तेरी भी नम है 
मेरी भी नम है 

मैं मुहब्बत से बोलू क़ि,
"इक बार अपने होंठो से  
अपना दीवाना कह दे  "ऐ दिलनशीं ""
और मेरी जिंदगी मुकम्मल हो जाये 
तेरे होंठो से गिरें कुछ शब्दों से

फिर कभी तेरी आँखों में देखूँ मैं
और तेरी आँखें मुस्कुराने की चाहत में 
आंसुओं से भर जाएं 

कि मैं कभी तेरी आँखों में देखूँ 
और मेरा दिल दरिया बन जाएं 

                      -रोशन कुमार "राहीं "