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Sunday, October 25, 2015

आ फिर से तुझे पास लिख दू अपने

आ फिर से तुझे पास लिख दू अपने 
इक बारिश ढूंढ  लाऊ 
और भीग जाऊ फिर से साथ  तेरे 
कुछ देर के लिए 

हर रोज जिंदगी एक जैसी न होगी 
हर बार वक़्त खुद को नहीं दोहराएगा 
एक दिन किरने ढल जाएँगी 
और तेरी खशबू मुझसे छिन  जाएगी 

आ फिर से तुझे बाँहों में भर लू अपने 
तू जो एक ख्वाब मेरा है 
तुझे देख कर बुनता है मेरा दिल सपने 
इक लम्हा, इक राह जो तेरे साथ गुजर जाएगी 
मेरी जिंदगी सुकून से भर जाएगी 
 फिर से, कुछ देर के लिए 

आ फिर से तुझे पास लिख दू अपने 
लिख दू फिर से की तुझसे मुहबत है 
लिख दू  फिर से तेरे की साथ चलना है 
लिख दू कितनी नफरत है मुझे 
तुझसे दूर जाने से,

बस मिल जाये स्याही थोड़ी और,
की तेरी धड़कानो को लिख दू 
धड़कनो के पास अपने 

 -रोशन कुमार "राहीं