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Sunday, October 25, 2015

किनारें


इतनी मुहब्बत से लिखा है 
तेरा नाम आँखों से सितारों में 
जैसे खोयी कश्ती को 
ढूंढ लिया हो किनारों ने 

तू भी क्या चीज़ है  राही 
बस कूद पड़ता है खाई में 
मुहब्बत की मीनारों से 

फूट कर रोया हूँ 
अपनी कहानी कह कर
 कतरों की आहट को सुना है 
मेरे कमरें की दीवारों ने 

इतनी सिद्दत से जला हूँ
दिए की तरह 
मुझे रोशन कहा है हज़ारों ने 

जब रात की शोहरत में
 तारें गुजरते है 
तेरी यादें मेरी आँखों में चमकती है 

दिल उस म्यान सा बिखर गया है मेरा 
जिसे छलनी किया हो
 इश्क़ सी तलवारों ने 

इतनी मुहब्बत से लिखा है 
तेरा नाम आँखों से सितारों में 

 -रोशन कुमार "राहीं "