Follow by Email

Saturday, September 5, 2015

आरजू...



काश तुझे नींद थोड़ी देर से आती,
हर रात तुझसे मिलने की ख्वाहिश ,
मेरे बहुत से ख्यालों की अधूरी रह जाती है 

                                                काश वो शाम कुछ लम्हें और ठहर जाती                                                                                                                                   तेरी हथेली में कुछ और देर रहने  की ख्वाहिश 
मेरी हथेली की हर दफा अधूरी रह जाती है 

जब भी मिलता हूँ गले तुझसे 
ये वक़्त थमता क्यों नहीं  
हर बार गुफ्तगू कुछ धड़कनो की  
की अधूरी रह जाती है 

जब भी शुरू करता हूँ इश्क़ की बातें 
वक़्त गुजर जाता है और
बातें बस इकरार की
अधूरी रह जाती है

जब भी मुहब्बत से तेरी आँखों में देखता हूँ 
मुकद्दर कहता है मुझे देखकर 
बस इसीलिए तो जिंदगी कम पड़  जाती है 

तुझसे जैसे लोग मिलते है  तो 
घरौंदे बसते है 
वरना "राही" का क्या है 
वो चलते रहते है    
और जिंदगी गुजर जाती है 


-रोशन कुमार "राही"