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Thursday, September 17, 2015

परिंदे



चल मंजिल तक साथ चलते है 
और इक घरौंदा बनाते है 
मिलतें है, सपने  बुनते है 
और कहीं खो जातें है 

हम वो परिंदे है  
जिनका आसमाँ  एक है 
चल एक शाख चुनते है 
एक घर बनाते बनाते है 

थोड़ी रौशनी है जिंदगी में   
थोड़ा अन्धेरा है 
यकीन कर मेरा, कुछ दूर 
एक मोड़ पर हमारे खातिर खड़ा 
एक नया सवेरा है 

मेरी आँखों में मुहब्बत है 
इंतजार है,  इकरार है है 
मेरे कतरे मुझसे  कहते है कि  
तेरे साथ खड़ा अतीत तेरा है 

और एक दिन इश्क़ में जलता नजर आऊँगा 
और दुनियाँ कहेगी कि  ऐ "राही"
 अब रोशन नाम तेरा है 

                                                      

-रोशन कुमार "राहीं "