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Monday, August 31, 2015

कुछ ऐसे गुजरे जिंदगी



कुछ ऐसे गुजरे जिंदगी 
जैसे तेरी - मेरी कहानी हों 
अपनी किस्मत खुद लिखू मै 
और वो कुछ तेरी कुछ मेरी जुबानी हो 

जो दर्द का इक कतरा भी 
बिखरें तेरे ऊपर 
एक उम्र ऐसी गुजरे 
जिसमे मेरी आँखों में पानी हो 

मेरे सीने को कुछ ऐसे छू जाये तेरी साँसें 
जैसे इक अंधियारे की रौशनी से मुहब्बत 
में मिट गयी पूरी कहानी हो 

मै लिखू बेहिसाब तुझे  सोचते हुयेँ 
और जिंदगी कुछ ऐसे गुजरे 
जैसे ये सिर्फ तेरी मेरी कहानी हो.

-रोशन कुमार "राहीं "