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Tuesday, August 11, 2015

इक मुलाक़ात

ye kavita maine us lamhe ke liye likhi hai jisme ek ghajal ko sharab se ek rahi ko uske safer se aur ek insan ko apani jindagi se, Aur kisi ko kisi se "Ek mulakat" me muhabbat ho jati hai. ager apki ghajal hai ya apko rasto se muhbbat hai ya fir ager kabi apko bhi muhbbat ho gyi kisi se pehli mulakat me to ye kavita apke liye hai. 




कुछ लिखूँ कि  कोई  जवाब मिल जाये 
मेरी ग़जल को कोई नयी शराब मिल जाये 
मेरा दिल जलता रहें  ताउम्र और 
तुझें रौशनी बेहिसाब मिल जाये 

यूँ तो एक ही जिंदगी है एक ही मजिंल है मेरी 
तू बस मुस्कुराती रहे हमेशा 
और मुझे नये मुकाम मिल जाये 

चलना चाहत तेरी भी है मेरी भी है 
मै दो कदम चलू और 
जिंदगी के एक नये सवेरे में 
 तेरा साथ मिल जाये 

की तुझे मुझसे और मुझे तुझसे  मुहब्बत हो 
बस यूँ  ही मुस्कुराते हुये
 जिंदगी साथ गुजर जाये 

कूछ लिखूँ कि  कोई  जवाब मिल जाये 
मेरी ग़जल को कोई नयी शराब मिल जाये। .......

-रोशन कुमार "राही"