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Thursday, March 12, 2015

मेरे मन में भी

Dedicated to Tajinder Singh "man"
may be someday 'man' will read it....
 

मेरे मन में भी एक आहट  है 
इक मंजिल है, कुछ तस्वीरें है।
उलझ कर गिर पड़ता हूँ 
अक्सर चलते-चलते 
देखता हूँ पैरों मे 
खुद की  बनाई जंजीरें है।

अक्सर इक खुदा के पास जाता हूँ 
वही पुराने सवाल करता हूँ 
मेरे हांथो में भी मुहब्बत की लकीरें है क्या??
ये पेड़ और पत्ते और ये ओझल होती शामें 
गुम हूँ यहाँ तेरी शक्ल की तलाश में
ऐ 'मन' तेरे मन में भी 
मेरी तस्वीरें है क्या?

मेरे मन में भी इक मंदिर है 
जहा तेरी यादें है और तस्वीरें  है ।
अब ये पत्थर और ये दरिया 
मासूम लगते है 
बड़ी तल्लीनता से मेरी 
कविता मेरी आवाज सुनते  है'

कभी कभी बस पूछ बैठता हूँ 
इन जिंदगी भरती  हवाओं से 
तेरे दिल में भी शहतीरें है क्या??

मेरे मन में भी इक खालीपन है 
तेरी इबादत है, तेरी जरूरत है ।

जब ये मयकश मन आजाद होता है 
तो मै इक दरिया में लौट जाता हूँ 
जिसकी मासूम लहरें सवाल करती है 
हमारी किस्मत में भी किनारे होते है क्या??

मेरे मन में भी एक आहट  है 
इक मंजिल है,  कुछ तस्वीरें है ।

-रोशन कुमार "राही"