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Sunday, February 1, 2015

कुछ तो कह दे ऐ अजनबी

कुछ तो कह दे ऐ अजनबी 
कह दे कि, एक समुंद्र के किनारे 
तेरे कदमों के निशां है 
कह दे कि, नफरत मेरी खातिर 
तेरे दिल में अब भी जिंदा है 
कह दे फिर से की अब लौट जाऊ मै 

मै फिर से लिखूँ और इत्तेला हो तुझे 
मेरे दिल में वो किनारे आज भी जिन्दा है 
नफरत बन के ही सही तेरे  दिल में एक ख्याल 
'राही' के लिए जिन्दा है
सफर अभी बाकी है ख्वाहिशें अभी जिन्दा है

कह दे कि, तेरे हाथ में खंजर अभी बाकी है 
कह दे कि, मुझे जलता देखने की 
तेरे  दिल में फ़रियाद  अभी जिन्दा है

मै फिर से लिखूँ और मालूम हो तुझे
तेरी यादें मेरे जख्मों का हिस्सा है 
मै जलू और जलता रहूँ 
मेरी खातिर इससे बेहतर जिंदगी क्या है 

तू आइनों मिलतीं रह 
नफ़रतें कहती रह 
और मैं शब्दों में तेरी बातें बुनता रहू 
और एक दिन तुझे भी एहसास होजाये 
तू  है तो,  मुझे पता  है
की "जिंदगी-मुकम्मल" क्या है 

तू बस हवाओं में, आइनों में नजर आ जाये तो 
जिंदगी मिल जाती है,वर्ना क्या फर्क पड़ता है 
की रास्तें क्या है और जिंदगी क्या है 
               

-रोशन कुमार "राही"