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Sunday, November 16, 2014

तू रास्ता बन मेरा

अभी कुछ देर पहले चाय पी रहा था,और वही एक लाइन न जाने कहा से होंठो पर आई "तू रास्ता बन मेरा ",
जेब में एक पेज था तो सोचा जब तक चाय है कुछ लिख ही देते है. 

तू रास्ता बन मेरा 
मंजिल पे भी तू ही मिल 
मैं चलू दोपहर से घनी रात तक  
तू हौसला बन मेरा 
मेरी मुस्कुराहटों में भी तू ही मिल

कभी मुड़कर जो देख लू 
प्रेम पंछियों को,
हाथो में हाथ रखकर, रखते है 
दिल में नापाक दूरियां शामिल 
फिर तेरी यादें भर कर दिल में ,
चिल्लाता हूँ मैं 
तू शहर बन मेरा, 
 मेरे  दिल में भी तू ही मिल 

जब रफ़्तार में हो जिंदगी 
तो  भावनाओं  के लिए वक़्त कहा 
मुहब्बत सर पे चढ़ती है 
 तो कहना चाहता हूँ मैं 
मेरी बातों में भी तू ही मिल

अब चलू जो कुछ दूर तो 
चाँद सूरज सी कुछ उम्र ढल जाती है  
 तू हमसफ़र बन मेरी 
मेरी आँखों में भी तू ही मिल

 तू रास्ता बन मेरा 
मंजिल पे भी तू ही मिल 
  तू कह की मुहब्बत है मुझसे 
मेरे कतरों में भी तू ही मिल  
तू हाथ थाम कर  चल मेरा 
मेरी आत्मा में भी तू ही मिल 

तू रास्ता बन मेरा 
मंजिल पे भी तू ही मिल 
                        

                               -रोशन कुमार "राही"