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Tuesday, September 2, 2014

"राहीं "


ना जाने क्या तकलीफ  है उसको "रोशन"
वो अक्सर आइनों से बात करता है 
लिखता है चाहे जो भी हो 
कुछ और रास्तें चल कर देखूंगा 
वो अक्सर ज़िंदा रहने की बात करता है 
न जाने क्या बदला भा गयी सादगी उसको 
वो अक्सर रास्तों में  मिलता है 
और चलते रहने की बात करता है 

कुछ पग डंडियां हकीक़त की
तरफ ले जाती है मुझको 
कुछ गुमराह कर जाती हैमुझको 
फिर भी मैअक्सर
जिंदगी से इकरार करता हूँ
मै राही हूँ रास्तों से प्यार करता हूँ "

मिलता हूँ जब भी उससे 
मुस्कुराते रहने की दुआ देता है 
देखता हूँ उसे तो खुद मुस्कुरा देता है 
न जाने क्या मंजिल है उसकी 
न जाने कहा जाना चाहता है 
देखकर ऐसा लगता है 
वो अक्सर आइनों में हमदर्द तलाश करता है 

पूछता हूँ बुरेवक़्त में क्या करते हो "राही" 
वो  बस मुस्कुरा कर
गुजर जाने की बात करता है 

अक्सर इंसान थक जाता है 
और जिंदगी हार जाती है 
सफलता  कुछ कदम दूर
खड़ी देखती रह जाती है 
लेकिन इस बार ठहर कर नहीें 
चल कर देखूंगा, हार को ज़िंदा रह कर देखूंगा 

अंजाम की फिक्र कब थी मुझे 
मै "राही" हूँ कुछ और रास्तों से गुजर कर देखूंगा 



ये राही इश्क़ तो नहीं  करता  लेकिन सपनो पे किसका वश है :). 


एक बार ख़ूबसूरती ने सपने में आकर कहा 
की ठहर जाओ मेरी बाँहों में
उसने मुस्कुरा कर लिखा  की 
हमसफ़र बनना है तो मिल जाओ कहीं राहों में 
                                                               

                              -रोशन कुमार "राहीं "