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Sunday, August 3, 2014

इक छाँव लिखा है मैंने

 डायरी  के इक पन्ने पर फिर से 
 तेरा नाम लिखा है मैंने 
आज बारिश है कल धुप होगी 
नीले रंग में फिर से 
इक छाँव लिखा है मैंने
मन परछाइयाँ  देता है 
पीछे भागते रहने को 
कुछ पन्ने पलट कर डायरी के 
इबादतगाह लिखा है मैंने 

जब हज़ारों बुँदे चुभती है 
खालीपन में तो समंदर बनता है 
भीग कर वर्षोँ तेरी यादों में 
डायरी के इक पन्ने पर फिर से 
तेरा नाम लिखा है मैंने 

तेरी शायरी  भी क्या खूब है "रोशन "
इक बार तो खुद तुझको भी
 अंजान लिखा है उसने 

अक्सर सोच के दामन में
वो कातिल लौट आता है "रोशन"
डायरी के इक पन्ने  पर 
जिसके साथ जीने का ख्याल लिखा है तुमने 

वक़्त शातिर है जो बदल जाता है 
वरना उसे भी
 पागल आशिक़ लिख दिया  होता मैंने 
 डायरी  के इक पन्ने पर फिर से 
 तेरा नाम लिखा है मैंने। 

                                             -रोशन