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Thursday, September 12, 2013

तलाश "हैरत" की






वक्त  सवरता रहता  है, मन भीगता रह जाता है 
घुंघरू चीखते रहते है,दिल टूटता रह जाता है 

पंछी  जो बैठे  है उमीदों  की डाल  पर 
रखते है ख्वाबों  में कुछ परछाईयां संभाल  कर 
शामें ढलती रेहती है, दिल भागता रह जाता है 
सपने जलते रहते है, मन देखता रह जाता है 

रखी है दिल में मैंने अब भी, कुछ शेहतीरें संभाल कर 
जल रहे है अरमा मेरे, जैसे लौ मशाल  पर 
महफ़िलें चीखती रहती है, मै तुझे देखता रह जाता हू
मै  अपनी बन्द आँखों में तुझे ढूंढता रह जाता हू

अब आइने देख घबराता है दिल
उन लम्हों के अरमां को नही समझ पाता है दिल 
मंजिलें ढूंढटी रहती है मुझको, मै तुझे सोचता रह जाता हू

वक्त  सवरता रहता है, मन भीगता रह जाता है 
घुंघरू चीखते रेहते है, दिल टूटता रह जाता है 
                     ...............रोशन "